नवादा, जनवरी 1 -- नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता। नवादा जिले में पछुआ हवाओं के साथ बढ़ी कनकनी ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। जहां रसूखदार लोग अपने घरों में हीटर और गरम कपड़ों के बीच सुरक्षित हैं, वहीं नवादा शहर के हृदय स्थल के समीप ही स्थित मलिन बस्तियों में रहने वाले लोग परेशान हैं। विशेषकर पम्पूकल झोपड़पट्टी की स्थिति प्रशासनिक विफलता और सामाजिक संवेदनहीनता का सबसे बड़ा उदाहरण बन गई है। यहां की सर्द रातें अब केवल ठिठुरन नहीं, बल्कि गरीबों के लिए अस्तित्व का संकट लेकर आई हैं। इन बस्तियों में ठंड से बचाव को लेकर अब तक जिला प्रशासन द्वारा अलाव की व्यवस्था नहीं की गयी है, जबकि कम्बल आदि से भी सभी वंचित हैं। जिला प्रशासन के साथ ही समाजसेवियों की नजर भी इन पर नहीं पड़ सकी है। अपने सीमित संसाधनों से सभी इस ठिठुराती ठंड के साथ वे जंग लड़ र...