नई दिल्ली, दिसम्बर 27 -- भारत में चावल सिर्फ एक भोजन नहीं, बल्कि रोजमर्रा की थाली का अहम हिस्सा है। फिर भी आज के समय में चावल को लेकर डर, भ्रम और अपराधबोध बहुत आम हो गया है। कभी कहा जाता है कि चावल मोटापा बढ़ाता है, कभी डायबिटीज का कारण बताया जाता है, तो कभी हार्मोनल समस्याओं से जोड़ा जाता है। लेकिन न्यूट्रिशनिस्ट श्वेता शाह के अनुसार समस्या चावल नहीं, बल्कि उसे पकाने का तरीका और हमारी पाचन शक्ति है। आयुर्वेद कभी भी चावल को गलत नहीं मानता। वह भोजन को शरीर की अग्नि (digestive fire), मौसम और जीवनशैली के अनुसार देखने की सलाह देता है। यही कारण है कि एक ही चावल जब उबालकर छाना जाता है तो वह हल्का और सुपाच्य बनता है, जबकि प्रेशर कुकर में पकाया गया वही चावल भारी और ज्यादा ऊर्जा देने वाला हो जाता है। इसलिए चावल छोड़ने के बजाय यह समझना जरूरी है कि ...
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