नई दिल्ली, सितम्बर 11 -- प्रभात कुमार नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों के संविधान पीठ ने गुरुवार को कहा कि 'न्यायालय राज्यपाल को विधानसभा से पारित विधेयक पर निर्णय लेने का आदेश दे सकती है। लेकिन यह आदेश नहीं दे सकती कि निर्णय कैसे लेना है। संविधान पीठ ने संविधान पीठ ने यह टिप्पणी तब की, जब केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि ' हर विधेयक विशिष्ट तथ्य और परिस्थितियों पर आधारित होता है, इसलिए न्यायालय हर मामले के लिए एक समान समय सीमा तय नहीं कर सकती। इतना ही नहीं, केंद्र ने यह भी कहा कि शीर्ष कोर्ट राज्यपाल द्वारा विधायी प्रक्रिया के तहत किए गए किसी कार्य के लिए परमादेश जारी नहीं कर सकती। देश के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) बीआर गवई की अगुवाई वाली पांच जजों की संविधान पीठ में शामिल जस्टिस सूर्यकांत ने केंद्र सरकार की इस दलील के बाद कहा कि 'न्याय...
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