लखनऊ, जुलाई 7 -- लखनऊ, संवाददाता। इंदिरा नगर जैन मंदिर में चल रहे 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के दौरान जैन संत उपाध्याय आदीश सागर ने मुक्ति के मार्ग की सीख दी। उन्होंने कहा कि संसार से मुक्त होकर निर्वाण प्राप्ति का एक मात्र साधन सिद्धों की आराधना ही है। जैन संत ने बताया कि जो भक्त श्रद्धा पूर्वक विधान अनुष्ठान कर रहे हैं वो निश्चित रूप से निकट भविष्य में अपने कर्मों को क्षय करते हुए मुक्ति के मार्ग पर अग्रसर होंगे। इससे पूर्व सोमवार सुबह सनत कुमार व महावीर कुमार द्वारा भगवान को सिर पर लेकर पंडुकशिला पर विराजमान कराया गया। भगवान का 108 कलशों से अभिषेक किया गया। विश्व शांति की कामना से शांतिधारा की गई। जैन समाज के महामंत्री अभिषेक जैन ने बताया की सिद्धचक्र महामंडल विधान पूरी प्रभावना के साथ चल रहा है। इस अवसर पर अतिशय, भरत, दिव्य, नीरज, ऋ...