दरभंगा, दिसम्बर 9 -- जिले के बैग निर्माण फला-फूला कारोबार रहा है। वर्तमान में भी करीब 10 हजार लोग बैग व्यापार से जुड़े हैं। इनमें अधिकतर गरीब कारीगर हैं। व्यवसायी किराए के दुकान व गोदाम में रोजगार करते हैं। उद्यमी निजी स्कूलों के द्वारा विद्यार्थियों को बैग बेचने को बड़ी चुनौती मानते हैं। रमण मिश्र, प्रभाष चंद्र, जीवछ कुमार आदि बताते हैं कि स्कूल बैग के साइज का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। किताब के साथ पानी बोतल व लंच बॉक्स रखने के लिए जगह बनानी पड़ती है। उन्होंने बताया कि पहले अलग-अलग स्कूलों के बच्चे दुकानों से अपनी पसंद का स्कूल बैग खरीदारी करते थे, जो बंद हो गया है। आजकल निजी विद्यालय प्रबंधन कॉपी, किताब के साथ स्कूल बैग भी उपलब्ध करा रहा है। इसके कारण स्थानीय कारीगरों को बेरोजगारी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि उद्योग व जिला प...