​प्रयागराज, फरवरी 2 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले में टिप्पणी की है कि प्रदेश में निजी परिसर के भीतर धार्मिक प्रार्थना सभा आयोजित करने के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि ऐसी कोई स्थिति उत्पन्न होती है, जहां धार्मिक प्रार्थना सभा सार्वजनिक सड़क या सार्वजनिक संपत्ति तक फैलती है तो याची पुलिस को सूचित करेगा और ऐसी स्थिति में कानून के तहत आवश्यक अनुमति लेगा। ​ यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन एवं न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने मरानाथ फुल गॉस्पेल मिनिस्ट्रीज और इम्मानुएल ग्रेस चैरिटेबल ट्रस्ट की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया है। दोनों ईसाई संस्थाएं अपने निजी परिसर के भीतर प्रार्थना सभा आयोजित करने की अनुमति मांग रही थीं। याचिकाओं में यह दलील दी गई थी कि दोनों ईसाई संगठन अपने निजी परिसरों ...