कोडरमा, फरवरी 6 -- कोडरमा। झुमरीतिलैया शहर का स्टेशन के सामने का इलाका। मुन्ना भइया का पेपर दुकान सुबह-सुबह किसी राजनीतिक मंच से कम नहीं लग रही थी। पेपर वाले मुन्ना भैया के दुकान के पास बिक रही चाय भले ही दस रुपये की थी, लेकिन चाय से भी गर्मागर्म जारी बहस पूरी तरह सौ टके का लग रहा था। फड़फड़ाते हिन्दुस्तान पेपर के पन्ने और बगल में उबलती केतली की चाय के साथ सियासी तापमान भी हिलोरे मार रहा था। यहां जो भी था, वह अपनी-अपनी दलीलें देकर हर किसी को विजेता बता रहा था। मुन्ना भैया पेपर बेचने में व्यस्त और मस्त। तभी बाइक को स्टैंड पर खड़ा कर उसपर कमर टिकाए हुए साव जी ने पूछा, "का हो मुन्ना भाई, इ बार केकरा जीते के चांस हऊ?" तभी बगल की दुकान से हाथ में कुल्हड़ में भरी चाय लेकर पेपर दुकान के पास पहुंचे यादव जी ने कहा-साव, जी वोटवा ओकरे देंगे जो हमर द...
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