बदायूं, दिसम्बर 21 -- उसैहत। क्षेत्र में कानून का तराजू उलटा लटकता नजर आ रहा है। नाबालिगों से जुड़े मामलों में अब तक तीन घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जहां बच्चों की जगह उनके मां-बाप को जेल की सजा दी गई। बाल सुधार गृह की व्यवस्था को नजरअंदाज कर अपनाई गई इस पुलिसिया कार्यशैली ने न्याय, कानून और संवैधानिक जिम्मेदारियों पर सीधे सवाल खड़े कर दिए हैं। केस-1 क्षेत्र के एक स्कूल में कक्षा आठ की छात्रा से दूसरे समुदाय के चार नाबालिग किशोरों द्वारा 17 दिसंबर को छेड़छाड़ करने का मामला सामने आया है। पीड़ित पक्ष ने मामले की शिकायत पुलिस से की है। पुलिस ने आरोपियों पर मुकदमा दर्ज कर चारों किशोरों के परिजनों को नोटिस जारी किए गये थे। इस मामले में पुलिस ने नाबालिगों की बजाय उनकी माता रेश्मा पत्नी तारिक, जमरुदजहां पत्नी शाहिद, शबानाबेगम पत्नी जहीर और नाहिरा प...