लखनऊ, नवम्बर 28 -- श्रद्धा मानव सेवा कल्याण समिति की ओर से गोमती नगर के अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में छोड़ो कल की बातें नाटक का मंचन हुआ। परिकल्पना एवं निर्देशन अनुपम बिसारिया और कार्यशाला निर्देशन प्रभात कुमार बोस का रहा। नाट्य रचनाकार जेपी सिंह (जयवर्धन) की इस नाट्य कृति छोड़ो कल की बातें में कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से सामाजिक संवेदनाओं की चिंताजनक तस्वीर को दर्शकों के सामने खींचा। नाटक में संयुक्त परिवारों में सबका एक-दूसरे प्रति व्यवहार के प्रति सम्मान, एक दूसरे के प्रति व्यवहार के प्रति उदासीनता को रेखाकिंत किया गया है। नाटक में बताया गया है कि हमारी संवेदना धीरे-धीरे कम होती जा रही है। कटु शब्दों में कहा जाए तो हमारी संवेदना मरती जा रही हैं। दरअसल हम आत्म केंदित होते जा रहे हैं। भौतिकता की दौड़ में नैतिकता का ह्रास हो रहा है...