भभुआ, जुलाई 12 -- सावन माह में गंवई जीवन में रंग भरने में अहम रोल निभाते थे परंपरागत खेल, गुलजार रहते थे खेत-बागीचे, बुजुर्ग बढ़ाते थे हौसला गांवों में जगह-जगह छात्र-युवा कर रहे हैं खेलकूद प्रतियोगिता की तैयारी कभी चिक्का, कुद्दी, बजनी का था जलवा, अब गुम होने लगे परंपरागत खेल (युवा पेज की लीड खबर) रामगढ़, एक संवाददाता। सावन मास शुरू हो गया है। 29 जुलाई को नागपंचमी है। इस दिन चिक्का, कुद्दी, बजनी आदि खेलों की गांवों में प्रतियोगिता होगी। जो जीत दर्ज करेंगे, उन्हें इनाम मिलेगा। इसको लेकर गांव के छात्र-युवाओं ने खेल का अभ्यास शुरू कर दिया है। सावन में कभी चिक्का, कुद्दी व बजनी का जलवा हुआ करता था। अब जीवन में रंग घोलने वाले ये परंपरागत खेल गुम होने लगे हैं। अब यह सिर्फ यादों में है। खास यह कि इन खेलों में खिलाड़ी ही नहीं, आम लोग भी भागीदार होते...
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