नई दिल्ली, जनवरी 22 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। दिल्ली उच्च न्यायालय ने दुष्कर्म के एक मामले की प्राथमिकी को रद्द कर दिया है। मामले में उच्च न्यायालय ने यह देखा कि सहमति से बने रिश्ते में खटास आने के बाद दुष्कर्म का यह मुकदमा दर्ज किया गया था। पेश मामले में आरोपी पर जाति के आधार पर अत्याचार का आरोप था। उच्च न्यायालय ने उन्हें भी खारिज कर दिया है। न्यामयूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने फैसले में कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री से साफ पता चलता है कि पक्षकारों के बीच लंबे समय से आपसी सहमति से प्रेम संबंध था। मुकदमा जारी रखना कानून की प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल होगा। पीठ ने कहा कि नाकाम रिश्ते से पैदा हुई निजी शिकायतों को निपटाने के लिए आपराधिक कानून का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। शादी के झूठे वादे पर यौन शोषण के दावे को खारिज करते हुए ...
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