प्रयागराज, नवम्बर 14 -- प्रयागराज। अब से 52 दिन बाद शुरू होने जा रहे माघ मेले की तैयारियां इस वक्त बहुत पिछड़ी हैं। माघ मेले में आने वाली संस्थाओं और साधु-संतों के साथ ही मेला प्रशासन को भी इसकी चिंता है। काम पिछड़ने का सबसे बड़ा कारण गंगा का जलस्तर है। इस वक्त गंगा में इतना जल है कि पाटा खाली नहीं है। जलस्तर कम होने के बाद ही तैयारियों को तेज किया जा सकता है। इसे लेकर मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने शासन को पत्र लिखकर पीछे नहरों में जल भेजने का आग्रह किया है। दरअसल अब तक सभी माघ मेलों में सितंबर में टेंडर का काम होता है और अक्तूबर से निर्माण कार्य शुरू हो जाता है। दिसंबर में मेले की बसावट को अंतिम रूप दिया जाता है और संस्थाओं को जमीन आवंटित की जाती है। पौष पूर्णिमा मकर संक्रांति के बाद होने के कारण कल्पवासियों के लिए प्रबंध का समय मिल जाता ...
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