गंगापार, नवम्बर 27 -- धान कटने के बाद गेहूं की बोआई के लिए खेतों का पलेवा करने के लिए किसान नहरों में पानी छोड़े जाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन उपरौध राजबहा की सौ किमी लंबी नहरों में धूल उड़ने से किसान चिंतित हैं। मांडा क्षेत्र के दक्षिणी पहाड़ी क्षेत्र में बसे उपरौध कहे जाने वाले लगभग डेढ़ दर्जन ग्राम पंचायतों में खेतों की सिंचाई का एकमात्र साधन उपरौध राजबहा की नहरें ही हैं। इस समय धान की बरसात से नष्ट फसल से खेत लगभग खाली हो चुके हैं। गेहूं की बोआई के लिए किसान परेशान हैं, लेकिन नहरों में पानी न आने से किसान चाहकर भी खेतों का पलेवा नहीं कर पा रहे हैं। मांडा उपरौध क्षेत्र के डेढ़ दर्जन ग्राम पंचायतों में उपरौध राजबहा की लगभग सौ किमी नहरों का जाल बिछा हुआ है। बेलहा व दोहरा के किसान नचकू विश्वकर्मा, पुष्कर सिंह, श्रीपाल आदिवासी, जंगील...
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