हरदोई, दिसम्बर 27 -- हरदोई, वरिष्ठ संवाददाता। नहरों को किसानों की लाइफलाइन कहा जाता है क्योंकि इनसे खेतों को सिंचाई के लिए पानी मिलता है। जिले में 110 से ज्यादा गांवों के किसान पूरे साल रजबहा और उनसे जुड़े माइनरों से पर्याप्त क्षमता में पानी मिलने के लिए तरसते रहे। अंग्रेजों के जमाने में बने रजबहे खस्ताहाल होने की वजह से वे बार-बार किसानों को उम्मीदों के अनुसार पानी नहीं मिल सका। वहीं कही गूल पुरानी हो गईं तो कहीं पर नहर पटरी क्षतिग्रस्त होने के कारण भी रजबहों से जुड़ी माइनरों को क्षमता के अनुसार पानी नहीं मिल पाया। इस वजह से किसानों को निजी नलकूपों का सहारा लेना पड़ा। शासन स्तर से नहरों के कायाकल्प के लिए शुरू की जाने वालीं पुनरुद्धार की योजनाएं लेटलतीफी का शिकार हो गईं। अब वर्ष 2026 में उम्मीद है कि नहर विभाग की ओर से जरूरत के अनुसार किसान...