अश्वनी यादव आजमगढ़, जनवरी 7 -- नवजात बच्चों की आंखों में भी मोतियाबिंद हो रहा है। यूपी के पूर्वांचल में इस तरह के मामले आने से लोग डर गए हैं। आजमगढ़, गाजीपुर और जौनपुर जनपद में तीन माह में 15 से अधिक केस सामने आए हैं। इनके उपचार में शुरुआती छह से आठ सप्ताह महत्वपूर्ण होते हैं। नवजातों की दृष्टि के विकास के लिए यह समय बेहद अहम होता है। इसी अवधि में सर्जरी कर बच्चों की आंखों की रोशनी बचाई जा रही है। डॉक्टरों के मुताबिक, जन्मजात मोतियाबिंद में जन्म से ही या कुछ दिन बाद आंख का लेंस धुंधला हो जा रहा है। समय से उपचार न मिलने पर नवजात अंधे हो सकते हैं। शुरुआती दिनों में जानकारी होने के बाद उनका उपचार कराया जा रहा है। दवा से ठीक न होने पर सर्जरी कर लेंस लगाया जा रहा है। एसएनसीयू के साथ ग्रामीण क्षेत्रों की गहनता से निगरानी और जांच के दौरान जिले में...
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