समस्तीपुर, जनवरी 10 -- नदियां जीवन है, धरोहर है, सभ्यता है, संस्कृति है और पहचान भी। भारत की सभ्यता का इतिहास खंगालें तो उसमें नदियों का स्थान सर्वोपरि है परंतु दुर्भाग्य है कि हम और हमारी पीढ़ियां इस विरासत को संभाल पाने में सक्षम नहीं हो पाए। भारत को नदियों का देश कहा जाता है परंतु वही नदियां हमारी आंखों के सामने आज अपना वजूद खो रही हैं। अगर इसके कारणों की विवेचना करें तो इसकी जड़ में सिर्फ मानवीय भूल या फिर प्रकृति के साथ हो रहे छेड़छाड़ को सबसे प्रमुख माना जाएगा। जीवन दायिनी गंगा की कल-कल, निर्झर जलधारा अब बिल्कुल मृत प्राय हो रही है परंतु कुछ प्रकृतिविदों के अलावा आम लोगों में इस बात की चिंता है ही नहीं कि इन नदियों का अस्तित्व कैसे बचेगा और हमें अपने आप में कैसा परिवर्तन लाना होगा। समस्तीपुर जिले में गंगा, बूढ़ी गंडक, कमला, जमुआरी, ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.