गया, जनवरी 7 -- नदियों के सूखने से पशु पालन महंगा हो गया। किसानों की आमदगी घट गई। नदियों के रहने से मवेशियों का चारा उपलब्ध होता था। मवेशी पानी में नहाते। साफ-सफाई होती तो गंदगी कम रहती थी। ऐसे में मवेशी कम बीमार होते थे। नदियों तक पहुंचाने और चारा चराने को लेकर मवेशियों को गांव से नदियों तक लाया जाता था। इससे मवेशी स्वस्थ रहते थे। हाल के समय में मवेशी पालक दुकानों में मिलने वाले चारा, चोकर आदि को विकल्प के तौर पर इश्तेमाल करने लगे हैं। यह महंगा भी पड़ता है। ऐसे में किसानों को होने वाला लाभ काफी हद तक घट गया है। मवेशियों बेचने पर मजबूर हो रहे किसान बांकेबाजार, एक संवाददाता। प्रखंड की प्रमुख मोरहर, मड़ावर, सुरहर, हड़ही नदियों के सूखने से पशुपालकों पर गहरा असर पड़ा है। मवेशियों के लिए पानी की किल्लत तो है ही। चारे की कमी, दूध उत्पादन में गि...