बिहारशरीफ, जनवरी 8 -- आएं अपनी नदी बचाएं : नदियां सूखीं तो उजड़ गयी किनारे की अर्थव्यवस्था, जाल, नाव व धोबी घाट सब वीरान मछुआरों के जाल अब रह जाते हैं खाली, पुश्तैनी धंधा छोड़ने को मजबूर मछुआ समाज धोबी समाज पर दोहरी मार, नदी का मुफ्त पानी खत्म, मोटर चलाकर कपड़े धोने की लाचारी फोटो जाल : बिहारशरीफ के नया टोला में मछलियों को पकड़ने के लिए महाजाल बनाते मछुआरे। बिहारशरीफ, कार्यालय प्रतिनिधि। नदियां सिर्फ जलधारा नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के लिए रोटी का जरिया भी थीं। लेकिन, अतिक्रमण के कारण नदियों के सूखने और किनारे के सिमटने से स्थानीय अर्थव्यवस्था की कमर टूट गई है। नदी पर आश्रित समुदायों मछुआरे, नाविक और धोबी समाज का रोजगार छिन गया है। हालात यह कि जो हाथ कल तक जाल बुनते थे या नाव चलाते थे, वे आज दूसरे शहरों में मजदूरी करने को मजबूर हैं। नदियों...