शाहजहांपुर, दिसम्बर 10 -- मोहल्ला मदिरा खेल में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन भक्तिभाव से सराबोर माहौल रहा। श्रीबालाजी मानस सेवा समिति के तत्वावधान में चल रही कथा में आचार्य अंकुर शुक्ल ने जड़ भरत चरित्र, अजामिल आख्यान, ध्रुव तथा प्रहलाद चरित्र का विस्तार से वर्णन किया। आचार्य अंकुर शुक्ल ने जड़ भरत प्रसंग के माध्यम से बताया कि संत यदि संसार के भोगों में आसक्त हो जाएं तो उनका पतन निश्चित है, जबकि आम व्यक्ति संत संग से उच्चता प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि पाप कर्म ही नरक के मार्ग को प्रशस्त करते हैं, इसलिए तुच्छ कर्मों से बचकर सत्य और भक्ति के मार्ग पर चलना ही परम पुण्य है। ध्रुव चरित्र का उल्लेख करते हुए बताया गया कि भक्ति उम्र की मोहताज नहीं होती, दृढ़ संकल्प और श्रद्धा हर आयु में भगवान से मिलन का मार्ग खोल देती है। कथा समापन ...
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