सिद्धार्थ, फरवरी 11 -- भनवापुर, हिन्दुस्तान संवाद। क्षेत्र के अंदुआ शनिचरा गांव में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन सोमवार की रात ध्रुव चरित्र कथा का वर्णन किया गया। कथा सुन दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। अयोध्या से आई कथावाचक कनकेश्वरी देवी ने बताया कि एक बार उत्तानपाद सिंहाशन पर बैठे हुए थे। ध्रुव भी खेलते हुए राजमहल में पहुंच गए। उस समय उनकी अवस्था पांच वर्ष की थी। उत्तम राजा उत्तनपाद की गोदी में बैठा हुआ था। ध्रुव भी राजा की गोदी में चढ़ने का प्रयास करने लगे। सुरुचि को अपने सौभाग्य का इतना अभिमान था कि उसने ध्रुव को डांटा, गोद में चढ़ने का तेरा अधिकार नहीं है। अगर इस गोद में चढ़ना है तो पहले भगवान का भजन करके इस शरीर का त्याग कर और फिर मेरे गर्भ से जन्म लेकर मेरा पुत्र बन। ध्रुव रोते हुए अपनी मां के पास आए। मां को सारी व्यथा सुनाई। सुनी...
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