औरैया, नवम्बर 13 -- बिधूना विकासखंड क्षेत्र के रुरुखुर्द गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास वृंदावन से पधारे श्री नंदकिशोर पांडेय जी महाराज ने ध्रुव चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि राजा उत्तानपाद की दो रानियां सुनीति और सुरुचि थीं। सुनीति के पुत्र ध्रुव और सुरुचि के पुत्र उत्तम थे। एक बार जब राजा सिंहासन पर बैठे थे, तब बालक ध्रुव भी खेलते हुए वहां पहुंचे और गोद में बैठने का प्रयास करने लगे। इस पर सुरुचि ने ध्रुव को डांटते हुए कहा कि इस गोद में बैठने का अधिकार तभी मिलेगा जब तू भगवान का भजन कर मेरे गर्भ से जन्म ले। महाराज ने बताया कि अपमान से आहत ध्रुव अपनी मां सुनीति के पास पहुंचे और सारी बात बताई। सुनीति ने बेटे को समझाया कि यदि कुछ मांगना ही है तो भगवान से ही क्यों न मांगा जाए। मां की आज्ञा पाकर ध्रु...