बस्ती, दिसम्बर 14 -- बस्ती, निज संवाददाता। जिसका जीवन शुद्ध और पवित्र है उसी को भजनानंद मिलता है। जो पवित्र जीवन जीता है उसे ही ईश्वर का ज्ञान मिलता है। सुनीति का फल ध्रुव है, जो नीति के अधीन रहेगा उसे ब्रम्हानंद प्राप्त होता है। उक्त बातें कथावाचक मुक्तामणि शास्त्री ने दुर्गा नगर कटरा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कहीं। कथावाचक ने कहा कि राजा उत्तानपाद के दो रानियां और दो बेटे थे। राजा को सुनीति नहीं सुरूचि ही प्यारी थी। सुरूचि का पुत्र राजा की गोद में बैठा था। ध्रुव ने भी पिता से अपनी गोद में बिठाने के लिए कहा। ध्रुव को राजा गोद में बिठाए यह सुरूचि को पसंद नहीं था। राजा ने सोचा की ध्रुव को गोद में बिठाऊंगा तो रानी नाराज हो जाएगीं। राजा ने ध्रुव की अवहेलना की और मुख मोड़ लिया। ध्रुव की मां सुनीति ने ध्रुव से कहा कि मांगना ही है तो ...