ललितपुर, नवम्बर 6 -- देश के भविष्य यानि बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के बड़े-बड़े दावे भले ही किए जाते रहे हों लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। शिक्षकों के अभाव में राजकीय स्कूलों के विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर धौर्रा ग्राम में बना राजकीय इण्टर कालेज इसका उदाहरण है। पांच वर्ष बीतने के बाद भी यहां एक भी स्थाई शिक्षक तैनात नहीं किया गया। जनपद में माध्यमिक शिक्षा का ढांचा बेहद कमजोर रहा है। यहां परिषदीय स्कूलों की तुलना में माध्यमिक स्कूलों का अभाव रहा है। जिस कारण कक्षा आठ पास करने के बाद आगे पढ़ाई जारी रखने में छात्र-छात्राओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। समृद्ध परिवार के लोग अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए गैर जनपदों को भेजते हैं। वहीं गरीब परिवारों के बच्चों को पढ़ाई छोड़नी पड़ती है। सीमावर्ती धौर्रा और आ...
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