नोएडा, नवम्बर 18 -- ग्रेटर नोएडा। यथार्थ अस्पताल में मंगलवार को क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ सरविंदर सिंह ने बताया कि गांव व देहात क्षेत्रों में लकड़ी, फसल का कचरा और गोबर जैसे बायोमास ईंधन से खाना पकाया जाता है, जिससे घरों में लगातार धुआं भरता है। शहरों में वाहनों का धुआं, उद्योगों से निकलने वाले कण, निर्माण कार्य, कूड़ा जलना और स्मॉग फेफड़ों पर सीधे असर डालते हैं। दोनों स्थितियों में सांस की नलियों में सूजन बढ़ती जाती है और समय के साथ फेफड़ों की क्षमता घटती रहती है। वहीं, डॉ विपुल मिश्रा ने बताया कि यह सीओपीडी का शुरुआती लक्षण चलने तक से सांस फूलना हो सकता है। पिछले तीन महीनों में ओपीडी में आए लगभग 65 से 70 प्रतिशत मरीजों में सांस फूलने व खांसी रहने या बलगम ब...