लखीसराय, फरवरी 3 -- बड़हिया, एक संवाददाता। जीवन जन्म नहीं, कर्म प्रधान है। हरेक जीव स्वयं के कर्म अनुरूप ही जीवन का उत्सर्ग और पराभव प्राप्त करता है। सत्कर्म और दुष्कर्म का प्रभाव इह लोक से परलोक अर्थात वर्तमान और भविष्य जन्म जन्मांतर जीवन को प्रभावित करता है। उक्त बातें नगर के श्रीधर सेवाश्रम धर्मशाला में शुरू हुए दो दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के बीच सागर से आई राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी नीलम दीदी ने कही। ब्रह्माकुमारी संस्थान के द्वारा आयोजित इस ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ संयुक्त रूप से हुए दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। जिसे बीके नीलम दीदी, रोशनी बहन, निशा बहन, डॉ सत्येंद्र अरुण, मिथिलेश प्रसाद सिंह आदि द्वारा संयुक्त रूप से हुआ। इससे पूर्व भगवान की भक्तिमय आरती और कथा व्यास पीठ पर विराजित नीलम दीदी का फूल माला और मुकुट से स्वागत किया गया। संगीत और बच्चों...
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