औरंगाबाद, दिसम्बर 26 -- सरकारी क्रय केंद्रों पर धान खरीद की व्यवस्था किसानों के लिए राहत के बजाय परेशानी का कारण बनती जा रही है। पैक्स अध्यक्षों की मनमानी और सौदेबाजी के चलते किसानों को उनके धान का पूरा मूल्य नहीं मिल पा रहा है। हारवेस्टिंग के बाद भंडारण की सुविधा नहीं होने के कारण किसान मजबूरी में पैक्स से संपर्क करते हैं और बिना मूल्य तय किए ही धान उठवा दिया जाता है। बाद में भुगतान के समय दाम पर सौदेबाजी होती है और सरकारी दर के अनुरूप कागजों में खरीद दिखाकर वास्तविक भुगतान कम किया जाता है। किसानों का कहना है कि पैक्स में धान देने पर भी उन्हें बाजार भाव के आस-पास ही पैसा मिलता है जिससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। अधिकांश किसानों के पास न तो धान रखने की जगह होती है और न ही बोरे भरकर क्रय केंद्र तक ले जाने के साधन। इसी आशंका से किसान कम ...