गोपालगंज, जनवरी 24 -- कटेया, एक संवाददाता। जब-जब पृथ्वी पर धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान किसी न किसी रूप में अवतार लेते हैं और धर्म की स्थापना कर बैकुंठ धाम लौट जाते हैं। ये बातें मिश्रौली में आयोजित सहस्र चंडी महायज्ञ में शनिवार को संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथावाचक अनुराग कृष्ण महाराज ने कही। कथा के छठवें दिन उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, रासलीला, गोपीगीत तथा कलियुग के महान भक्तों राधा बाबा, भक्त सूरदास और जनाबाई के चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि प्रभु प्रत्येक युग में भक्तों की रक्षा के लिए अवतार लेते हैं।उन्होंने 'रास' शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने मात्र सात वर्ष की आयु में रास रचाया। सात वर्ष का बालक निर्विकार और कामरहित होता है, इसलिए रास शब्द का प्रयोग सोच-समझकर करना चाहिए...