रांची, दिसम्बर 7 -- रांची, संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने अभियंत्रण सेवा से जुड़े नियमों में देरी और लापरवाही पर राज्य की नौकरशाही को कड़े शब्दों में फटकार लगाई है। खंडपीठ ने कहा कि झारखंड इंजीनियरिंग सर्विस रूल्स, 2016 की वैधता और संशोधन पर वर्षों से ठोस पहल न होने के कारण पथ निर्माण, जल संसाधन और पेयजल विभाग के अधिकारियों की नियुक्ति और पदोन्नति लगभग ठप पड़ी हुई है। अदालत ने कहा कि 2016 के बाद से भर्ती और प्रोन्नति के स्पष्ट नियम न होने को 'लेथार्जिक अप्रोच' यानी घोर प्रशासनिक सुस्ती माना जाएगा। इससे जुड़ी 13 रिट याचिकाओं पर सुनवाई हो रही है। जिनमें इंजीनियरिंग कैडर के अधिकारियों ने संशोधित नियमों को चुनौती दी है। मामले की सुनवाई जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस एके राय की खंडपीठ में हुई। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह टिप्पणी भी की ...