नई दिल्ली, नवम्बर 21 -- मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि दोषी कैदियों की समय से पहले रिहाई पर सिर्फ सरकार ही विचार कर सकती है। अदालत ने कहा कि जब सजा सुनाने का हिस्सा खत्म हो जाता है, तो दोषी न्यायिक हिरासत में नहीं रहता है इसलिए, अदालत में जमानत या अंतरिम जमानत नहीं मांगी जा सकती है। जस्टिस एन. सतीश कुमार और एम. जोतिरमन की एक डिवीजन बेंच ने 19 नवंबर को जुबैथा बेगम और 12 अन्य की याचिकाओं के एक बैच को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। याचिकाओं में उनके अपने-अपने रिश्तेदारों को अंतरिम बेल पर रिहा करने की मांग की गई थी, जबकि उनकी समय से पहले रिहाई की याचिकाएं सरकार के पास लंबित थीं। पीठ ने कहा कि सजा काट रहा एक कैदी अदालत की कस्टडी में नहीं होता है। इसलिए, जमानत देने का सवाल ही नहीं उठता, अंतरिम जमानत तो दूर की बात है। अभी के मामलों में, याचिकाकर्ता ...