मुजफ्फरपुर, नवम्बर 27 -- मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। देसी शराब-ताड़ी उत्पादन के काम को छोड़कर आठ हजार महिलाओं ने दूसरा कारोबार अपनाया तो उन्हें जीवकोपार्जन के साथ मान-सम्मान भी मिला। जिले के अलग-अलग प्रखंड की ये महिलाएं नशा मुक्ति अभियान की प्रेरणा बनी। बुधवार को नशा मुक्ति दिवस पर इनमें से बड़ी संख्या में महिलाओं को जिले के साथ अलग-अलग प्रखंड में आयोजित समारोह में सम्मानित किया गया। सकरा की अमजेरी खातून का 2016 से पहले देसी शराब बनाने का काम था। शराबबंदी के बाद वह कपड़े के कारोबार से जुड़ी और आज अपना कपड़ा बेचने का काम कर रही हैं। कुढ़नी की सरला अब अपनी दुकान चलाने के साथ पशुपालन का कारोबार करती हैं। इस तरह की आठ हजार महिलाएं हैं जो 2016 में शराबबंदी के बाद अलग-अलग काम से जुड़ी। इसमें 50 फीसदी से अधिक महिलाएं 10-15 हजार रुपये कमा रही ह...