एटा, नवम्बर 1 -- शनिवार को पूरे जिले में देवोत्थान पर्व पारंपरिक तरीके से मनाया गया। लोगों ने अपने आंगन में गेरू और चावल से भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की आकृतियां बनाईं और गन्ना, सिंघाड़ा, शकरकंद, खीर और पूरियां चढ़ाकर देवताओं को जगाया। उन्होंने परंपरा के अनुसार तुलसी और शालिग्राम का विवाह भी किया और सभी शुभ कार्यों के बिना किसी बाधा के सफलतापूर्वक संपन्न होने की प्रार्थना की। देवउठनी एकादशी के दिन महिलाओं और बच्चों ने अपने आंगन साफ किए और चाक, चावल और गेरू से देवताओं की आकृतियां बनाईं। फिर शाम को परिवार के बड़ों ने अविवाहित युवकों, युवतियों और बच्चों से छिपकर देवताओं को गन्ना, सिंघाड़ा, शकरकंद और अन्य मौसमी फल चढ़ाए और रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की। उसके बाद मंत्रों के जाप के साथ तुलसी और शालिग्राम का विवाह किया गया। सभी रस्में...