प्रयागराज, जुलाई 7 -- प्रयागराज। प्रयागराज में सावन के महीने में गहरेबाजी की परंपरा है। इसकी तैयारी में एक महीने पहले से ही घोड़ों की खुराक बढ़ा दी जाती है। यह परंपरा करीब दौ सौ वर्ष से भी ज्यादा पुरानी बताई जाती है, जिसे तीर्थ पुरोहितों ने शुरू किया था। गहरेबाजी देखने के लिए ना केवल बड़ी संख्या में शहरियों का हुजूम उमड़ता है बल्कि घोड़ों की कदमताल व उसकी टाप पर हर किसी की निगाह रहती है। सावन के हर सोमवार को गहरेबाजी में उतरने के लिए एक महीने पहले से घोड़ों को उनकी खुराक में बादाम, दूध, देशी घी, मक्खन जैसी चीजें दी जाती हैं, जबकि अन्य दिनों में चना और घास उनकी खुराक होती है। गहरेबाजी से पहले घोड़ों को चार किग्रा चना और पांच किग्रा घास भी खिलाई जा रही है। पिछले 35 वर्षों से गहरेबाजी में हिस्सा ले रहे कटरा के बदरे आलम के पास बादशाह व सुल्ता...
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