नई दिल्ली, जनवरी 24 -- फल और दूध का कॉम्बिनेशन अक्सर विवाद का विषय रहता है। कुछ लोग इसे हेल्दी मानते हैं, तो कुछ इसे पाचन के लिए नुकसानदायक बताते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, समस्या फल या दूध में नहीं, बल्कि उनके गलत संयोजन में होती है। न्यूट्रिशनिस्ट डिंपल जांगड़ा के अनुसार, अगर आयुर्वेदिक सिद्धांतों को समझकर सही फल चुने जाएं तो दूध के साथ उनका सेवन सुरक्षित और लाभकारी हो सकता है।आयुर्वेद भोजन को चार आधारों पर समझता है- रस, वीर्य, विपाक और गुण।रस भोजन का स्वाद होता है, जैसे मीठा, खट्टा या कड़वा।वीर्य भोजन की तासीर होती है- ठंडी या गर्म।विपाक पाचन के बाद भोजन का शरीर पर अंतिम प्रभाव है।गुण भोजन की प्रकृति को दर्शाता है, जैसे भारी-हल्का, चिकना-सूखा या स्निग्ध। डिंपल जांगड़ा बताती हैं कि दूध मीठा, ठंडा, भारी और स्निग्ध गुणों वाला होता है। इसलिए...