नई दिल्ली, जनवरी 2 -- दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि दुष्कर्म के झूठे आरोपों में किसी व्यक्ति को फंसाए जाने से आरोपी को ऐसे घाव मिलते हैं जो जिंदगी भर नहीं मिट सकते और कथित पीड़िता एवं आरोपी दोनों के लिए इसके दूरगामी परिणाम होते हैं। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा दिल्ली पुलिस द्वारा निचली न्यायाल के आदेश को चुनौती देने के लिए दायर एक पुनरीक्षण याचिका की सुनवाई कर रही थीं। पीड़िता के अपने पुराने बयानों से मुकर जाने के बाद सभी आरोपियों को निचली न्यायालय ने बरी कर दिया था। हाईकोर्ट ने 15 दिसंबर के एक आदेश में कहा, ''जिस आरोपी को झूठे आरोपों में फंसाया हुआ पाया जाता है, उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान, कारावास, सामाजिक कलंक और मानसिक पीड़ा ऐसे घाव छोड़ सकते हैं जो जीवनभर नहीं भर सकते। ये पीड़ा ठीक उसी तरह है जैसे यौन उत्पीड़न के वास्तविक मामलों में पीड़िता...