नई दिल्ली, जून 20 -- मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट में 100 बेसिस पॉइंट की कटौती के बाद बैंकों को अपनी जमा दरों में कमी करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इससे बचत खातों की ब्याज दरें 25 साल के निचले स्तर पर पहुंच गई हैं और सावधि जमा दरों में भी भारी कटौती देखी जा रही है। हालांकि, इससे बैंकों के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो रही है-यदि ऋण मांग बढ़ती है तो नकदी संकट का खतरा बढ़ सकता है। बैंक उम्मीद कर रहे हैं कि व्यापक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच ग्राहक अपनी निष्क्रिय राशि को बैंकों में ही रखना पसंद करेंगे। रेपो दर में कटौती का असर आरबीआई की हालिया रेपो दर में 50 आधार अंक की कटौती ने 60% फ्लोटिंग दर ऋणों की ब्याज दरों को स्वतः कम कर दिया है, जो रेपो जैसे बाहरी बेंचमार्क से जुड़े हैं। हालांकि, सावधि जमा की ब्याज दरें केवल नई जमा खोलन...
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