नई दिल्ली, फरवरी 15 -- मद्रास हाई कोर्ट ने 9 वर्षीय बच्ची की हत्या के आरोप में उसके मां-बाप की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट की तरफ से कहा गया कि भले ही बच्ची मानसिक रूप से कमजोर थी, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उसको जान से मार दिया जाए, अगर ऐसे बच्चों की हत्या की अनुमति दे दी जाए, तो फिर कोई भी बच्चा जीवित ही नहीं बचेगा। मद्रास हाई कोर्ट के मदुरै पीठ ने शुक्रवार को दंपत्ति को दोषी करार देते हुए उनकी याचिका को खारिज करते हुए उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा। न्यायमूर्ति जी. के इलंथिरैयन और आर पूर्णिमा की पीठ ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि हर माता-पिता का यह अनिवार्य कर्तव्य होता है कि वे अपने बच्चे की देखभाल करें, चाहे वह बच्चा मानसिक बीमार हो, शारीरिक विकलांग हो या फिर जन्म के साथ ही किसी बीमारी के साथ क्यों न जन्मा हो। पीठ...