नई दिल्ली, जनवरी 27 -- हमारे जीवन में बहुत अव्यवस्था है। उसे ठीक किए बिना ध्यान का कुछ भी अर्थ नहीं। यदि आप यह सोचकर ध्यान में बैठ जाएं कि इससे व्यवस्था आ जाएगी, तो ऐसा नहीं हो सकता। पहले अपने दैनिक जीवन में सुव्यवस्था स्थापित करें, तब ध्यान की गहराइयों में उतरने का लाभ होगा। सब युद्ध की तैयारियों में लगे हुए हैं। इन तैयारियों से विश्व में कहीं-न-कहीं, किसी-न-किसी प्रकार का विस्फोट अवश्य होगा। हम एक-दूसरे के साथ शांतिपूर्वक कभी भी नहीं रह पाए हैं। शांति के बारे में हम बातें खूब करते हैं। सारे धर्मों ने शांति का ही संदेश दिया है, लेकिन इस धरती पर शांति कभी भी संभव नहीं हो पाई है। यह धरती, जिस पर हम सब रहते हैं, किसी एक देश की नहीं है। यह हम सबकी और हमारी धरती है।दूर करें हृदय से हिंसा इस नफरत का संभवतः एक प्रमुख कारण यह है कि हमारे हृदय हि...