हाजीपुर, अक्टूबर 23 -- हाजीपुर। एक वे दिन भी हुआ करते थे जब चुनाव लड़ रहे प्रतिद्वंदियों के बीच सहिष्णुता, सद्भाव और आत्मीयता का ऐसा माहौल होता था कि उसकी मिसालें दी जाती थी। किंतु आज वैसा कोई माहौल दिखाई नहीं पड़ता। शत्रुता और कटुता आज चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों की पहचान बन गई है। असहिष्णुता तो ऐसी कि एक-दल दूसरे के लिए असंसदीय और अभद्र शब्दों के प्रयोग से भी परहेज नहीं कर रहे। हम बात कर रहे हैं हाजीपुर विधानसभा क्षेत्र में 1962 में हुए चुनाव की। कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी में आमने-सामने का संघर्ष था। कांग्रेस के उम्मीदवार थे दीप नारायण सिंह जो दीप बाबू के नाम से ज्यादा जाने जाते थे। उनकी विशेषता यह कि वह कभी चुनाव हारे नहीं और कुछ महीने तक बिहार के मुख्यमंत्री भी रहे। आजादी के बाद वे पहला चुनाव महनार विधानसभा क्षेत्र से लड़े और जीते। ...
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