चतरा, नवम्बर 21 -- टंडवा, निज प्रतिनिधि। नियत और नियती का खेल निराला है, जिस सुरेन्द्र का दस दिन पूर्व छेका हुआ था। उसकी शादी दिसम्बर माह में होने वाली थी। वह हमेशा के लिए दुनिया छोड़ गया। परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार सुरेन्द्र की शादी चतरा के लमटा बधार में तय हुई थी। शुक्रवार की सुबह अपनी मंगेतर का परीक्षा दिलाने के लिए अपने घर से निकला था, पर जिन्दगी की परीक्षा से हार गया। इसी बीच यह हादशा हो गयी। सवाल यहां उठ रहा है कि आखिर कब तक राहगीरों की मौत कोल वाहनों से होती रहेगी। इससे भी बड़ा सवाल यह है कि जवान बेटा खोने के बाद परिजन मुआवजा के लिए तड़प रहे हैं पर इनकी वेदना कोई सुनने वाला नहीं।

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