नई दिल्ली, दिसम्बर 6 -- सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे दिव्यांग कैदियों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया एक मजबूत, स्वतंत्र और सुलभ शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह सिस्टम शिकायतों का तुरंत पंजीकरण, प्रभावी निगरानी और समय पर समाधान समाधान सुनिश्चित करेगा ताकि कैदियों को व्यवस्थागत उपेक्षा, भेदभावपूर्ण प्रथाओं से बचाया जा सके। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि दिव्यांग कैदियों को जेल प्रणाली के भीतर समावेशी शिक्षा तक सार्थक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त सुविधाएं प्रदान की जाएं। पीठ ने 2 दिसंबर के अपने आदेश में कहा कि किसी भी कैदी को केवल दिव्यांगता के कारण पढ़ाई के मौके से दूर नहीं किया जाएगा, और उनकी प्रभावी भागीदारी सुनिश...