नई दिल्ली, नवम्बर 27 -- नई दिल्ली। विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दिव्यांग व्यक्ति के सम्मान को बनाए रखने के लिए कड़े कानून बनाने की वकालत की है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को दिव्यांगों और दुर्लभ अनुवांशिक बीमारियों से पीड़ित लोगों का मजाक उड़ाने वाली अपमानजनक कृत्यों को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम की तर्ज पर दंडनीय अपराध बनाने के लिए एक कानून बनाने पर विचार करने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने 'केंद्र से कहा कि आप एससी-एसटी एक्ट की तरह एक कड़ा कानून क्यों नहीं ला सकते जो जातिवादी बातों को जुर्म मानता हो, यदि आप उन्हें नीचा दिखाते हैं तो सजा है।' एससी-एसटी (प्रिवेंशन ऑफ एट्रोसिटीज) एक्ट, 1989 अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों के खिलाफ जातिवाद...
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