संभल, दिसम्बर 3 -- विश्व दिव्यांग दिवस पर संभल के उन युवाओं की कहानियां सामने आती हैं, जिन्होंने अपनी शारीरिक चुनौतियों को न केवल मात दी, बल्कि सफलता के ऐसे आयाम स्थापित किए जिन पर पूरा जिला गर्व करता है। यह युवा संदेश दे रहे हैं कि दिव्यांगता कोई कमजोरी नहीं, बल्कि हिम्मत और जज़्बे की कसौटी है। संभल में कई दिव्यांग खिलाड़ी खेल मैदान में मेडल जीतकर प्रदेश और देश का नाम रोशन कर रहे हैं। वहीं शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा की दम पर नई मिसालें कायम कर रहे हैं। पैर नहीं, हौसलों की उड़ान. से अली वारिस ने पंजा कुश्ती में रचा इतिहास संभल। शहर से सटे तुर्तीपुर इल्हा निवासी अली वारिस जन्म से पैरों से दिव्यांग हैं, लेकिन हौसले के बल पर उन्होंने वह कर दिखाया जो सामान्य व्यक्ति भी सोच नहीं पाता। हाथों के बल जीवन आगे बढ़ाते हुए उन्ह...