नई दिल्ली, जुलाई 17 -- सुप्रीम कोर्ट ने एक दिवंगत व्यक्ति की पत्नी को उसकी जमीन का असली मालिक घोषित करने के आदेश को गुरुवार को बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि वसीयत में उसकी स्थिति या जायदाद से उसकी बेदखली के कारण का खुलासा न करने की पड़ताल अलग से नहीं की जानी चाहिए, बल्कि मामले के तथ्यों के आलोक में की जानी चाहिए। न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा नवंबर 2009 में पारित उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी, जिसमें पत्नी को भूमि का मालिक घोषित किया गया था। पीठ ने कहा कि नवंबर 1991 में उस व्यक्ति की मृत्यु के बाद, उसके भतीजे ने मई 1991 में अपने चाचा द्वारा निष्पादित एक वसीयत का हवाला देते हुए मुकदमा दायर किया, जिसमें भूमि उसके नाम कर दी गई थी। अधीनस्थ अदालत ने मई 1991 की वस...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.