नई दिल्ली, नवम्बर 7 -- यमुना को प्रदूषण और अतिक्रमण से मुक्त कराने की दिशा में एक चुनौती सामने आई है। यमुना डूब क्षेत्र (ओ-जोन) में बनी 90 अवैध कॉलोनियों में रहने वाले करीब 20-25 लाख लोगों के विस्थापन का फैसला फिलहाल कानूनी पेचीदगियों में उलझ गया है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में हलफनामा दायर करते हुए कहा है कि स्पष्ट कानूनी दिशानिर्देश और पुनर्वास नीति के बिना कार्रवाई संभव नहीं है। यह मामला जनवरी 2024 में प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर एनजीटी द्वारा स्वतः संज्ञान लिए जाने के बाद सामने आया था। इन कॉलोनियों से बिना उपचारित सीवेज सीधे यमुना में जा रहा है, जिससे नदी के जल की गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है। एनजीटी ने सात अप्रैल 2025 को आदेश दिया था कि यमुना किनारे अवैध कॉलोनियों को हटान...
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