नई दिल्ली, जनवरी 15 -- दिल्ली के प्रमुख हाईवे प्रोजेक्ट्स में कंपेंसेटरी वनरोपण की बड़ी खामी सामने आई है। सालों से विकास कार्यों के लिए पेड़ काटने पर बदले में पेड़ लगाने का वादा किया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने पिछले हफ्ते दिल्ली सरकार के अधिकारियों के साथ बैठक में UER-2 और द्वारका एक्सप्रेसवे के लिए लाखों पेड़ लगाने में गंभीर कमी बताई।UER-2: तीसरी रिंग रोड पर पेड़ों का हिसाब अधूरा UER-2 को दिल्ली की तीसरी रिंग रोड कहा जाता है। यह उत्तर दिल्ली के NH-44 (बंकौली-अलीपुर के बीच) से शुरू होकर बवाना इंडस्ट्रियल एरिया, रोहिणी, मुंडका, बकरवाला और नजफगढ़ से गुजरता है। फिर द्वारका एक्सप्रेसवे से जुड़कर दिल्ली एयरपोर्ट के शिव मूर्ति जंक्शन पर NH-48 पर समाप्त होता है। इसके दिल्ली वाले हिस्से का 17 अगस...