नई दिल्ली, फरवरी 13 -- दिल्ली की जमीन पर कई ऐतिहासिक इमारतें खड़ी हैं, लेकिन तुगलकाबाद किला अपनी अलग पहचान रखता है। यह किला कभी अपनी मजबूती और भव्यता के लिए जाना जाता था, लेकिन आज यह खामोश खंडहर बन चुका है। इसके साथ जुड़ी एक ऐसी कहानी है, जिसने इसे 'श्रापित किला' की पहचान दी। कहा जाता है कि एक सूफी संत के श्राप ने इस भव्य किले को वीरान कर दिया। 1321 में बने इस किले में उसके निर्माता भी कभी रह नहीं सके। समय के साथ यह जगह उजाड़ हो गई और आज यहां सिर्फ टूटती दीवारें और इतिहास की गूंज बची है। चलिए जानते हैं कि आखिर क्यों इसे श्रापित किला कहा जाता है।किले का निर्माण और उद्देश्य तुगलकाबाद किले का निर्माण 1321 में तुगलक वंश के पहले सुल्तान गयासुद्दीन तुगलक ने करवाया था। उनका उद्देश्य दिल्ली को मंगोल आक्रमणों से सुरक्षित करना था। उस समय मंगोल हमलो...