हजारीबाग, दिसम्बर 6 -- हज़ारीबाग वरीय संवाददाता दिमागी बीमारियों का इलाज दवाइयों में नहीं, बल्कि पेट में छिपा है। यह कहना है हज़ारीबाग के मटवारी निवासी और स्वीडन की चाल्मर्स यूनिवर्सिटी के प्रोटीन वैज्ञानिक डॉ. रंजीत कुमार का। बीस वर्षों से अधिक समय तक प्रोटीन संरचना, अमाइलॉइड फोल्ड और न्यूरोडीजेनेरेशन पर शोध कार्य कर चुके डॉ. रंजीत का कहना है कि अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसी बीमारियां दिमाग में नहीं, पेट में शुरू होती हैं। डॉ. रंजीत के अनुसार, आधुनिक विज्ञान और आयुर्वेद दोनों यही संकेत देते हैं कि पेट में मौजूद माइक्रोबायोम, पाचन अग्नि और आंतों की दीवार सीधे दिमाग के स्वास्थ्य से जुड़े हैं। वह बताते हैं कि हमारी आंतों में 10 करोड़ से अधिक नर्व सेल्स होते हैं और शरीर का 90 प्रतिशत सेरोटोनिन तथा 50 प्रतिशत डोपामाइन, यानी मूड और मानसिक स्वास्थ...