नई दिल्ली, जनवरी 20 -- सोमवार का दिन राजस्थान हाईकोर्ट के लिए बिल्कुल सामान्य था। अदालतों में रोज़ की तरह बहसें चलीं, फाइलें खुलीं, दलीलें रखी गईं। इन्हीं अदालतों में पूरे आत्मविश्वास और सक्रियता के साथ मौजूद थे वरिष्ठ अधिवक्ता अजय कुमार जैन। किसी को आभास तक नहीं था कि यही दिन उनके जीवन की अंतिम अदालत साबित होगा। दिनभर कोर्ट की कार्यवाही में व्यस्त रहने के बाद भी अजय कुमार जैन ने अदालत से लौटकर आराम नहीं किया। न्यायिक कामकाज समाप्त होने के बाद भी वे अपने कक्ष में मौजूद रहे। शाम करीब चार बजे तक वे अधिवक्ताओं के साथ बार काउंसिल चुनाव और उससे जुड़े जटिल कानूनी पहलुओं पर गहन चर्चा करते रहे। उनकी आवाज़ में वही स्पष्टता थी, तर्कों में वही मजबूती और चेहरे पर वही सहज आत्मविश्वास, जिसके लिए वे जाने जाते थे। लेकिन इसी सक्रियता के कुछ ही घंटों बाद व...