अयोध्या, नवम्बर 25 -- अयोध्या। दशरथ राजमहल बड़ा स्थान में बिंदुगद्याचार्य स्वामी देवेन्द्र प्रसादाचार्य महाराज के निर्देशन में विवाहोत्सव के उपलक्ष्य में चल रही रामकथा में प्रसिद्ध कथाव्यास जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी रत्नेश प्रपन्नाचार्य ने कहा कि यद्यपि श्रीसीताराम भगवान अभिन्न है। फिर भी लोक जगत की प्रतिष्ठापना व दाम्पत्य जीवन की मर्यादा के लिए उन्होंने विवाह लीला का संवरण किया। आचार्य प्रवर ने कहा कि इसके परिणामस्वरूप परमात्मा को भक्ति की अधिष्ठात्री की प्राप्ति होती है। यही विवाह का परम सौष्ठव है। उन्होंने भगवान के बाल स्वरूप की वंदना करते हुए कहा कि अयोध्या की पावन भूमि में परात्पर ब्रह्म की लीला की अनुभूति की जा सकती है। उन्होंने कहा कि शास्त्रों ने जिस ब्रह्म को अत्यंत दुरुह माना है, वह भक्ति के पराभूत होकर महाराज दशरथ के आगंन में...