विधि संवाददाता, फरवरी 14 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले में अहम फैसला सुनाया है। उच्च न्यायालय ने कहा है कि दहेज मृत्यु में विरलतम से विरल मामलों में ही उम्र कैद की सज़ा दी जानी चाहिए। जहां यह स्पष्ट हो कि पीड़िता की हत्या की गई है। कोर्ट ने दहेज मृत्यु के आरोपी की दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए उसकी उम्रकैद की सजा को घटाकर अब तक जेल में बिताई गई अवधि तक सीमित कर दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि दोनों अभियुक्तों को तत्काल रिहा किया जाए। यह आदेश बिजनौर के चांदपुर के शकील अहमद और अन्य की अपील पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सलील कुमार राय एवं न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने दिया। अभियोजन के अनुसार, मृतका नाजिया की शादी 14 दिसंबर 2014 को शेरबाज उर्फ शादाब से हुई थी। आरोप था कि शादी के बाद ससुराल पक्ष ने मोटरसाइकिल और दो लाख रुपये क...